Tuesday, April 17, 2012

PYAASA

बिरहा की अग्नि मे जलना सिखाया
खयालो में खोये हुए चलना सिखाया
नींदों में करवटें बदलना सिखाया
सूखे लब्जों से शायरी करना सिखाया
बहुत कुछ सिखाया आशिकी ने मगर टूटे दिल के दर्द को सहना नहीं सिखाया


गम को हंसी से झेलना सिखाया
कम को ख़ुशी से बाटना सिखाया 
कल को आज में भूलना सिखाया
मैं को हम मे खोना सिखाया
बहुत कुछ सिखाया दोस्ती ने मगर छल की छुरी के धार को झेलना नहीं सिखाया 

खयालो को कागज़ पे सजाना सिखाया
दुनिया को अंको के दर्पण में दिखाया
जिज्णासा की रौशनी से खोजना सिखाया 
भटके विद्यार्थी को, सीखना सिखाया 
बहुत कुछ सिखाया पढाई ने लेकिन, सोच को सच में बदलना नहीं सिखाया 


शिक्षा के कंधे पे हाथ रख चलना सिखाया
खुद के कंधे पे ज़िम्मेदारियाँ रख  उड़ना सिखाया  
प्यार की डोरी से रिश्तो को बुनना सिखाया 
परायों की टोली से अपनो को चुनना सिखाया 
बहुत कुछ सिखाया जिंदगी ने लेकिन सिर्फ .................... जीना नहीं सिखाया 

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