Sunday, February 1, 2015

GAM HI SAHI

Inspired by a brilliant song from the movie ROG. 
https://www.youtube.com/watch?v=Tw_MX7jzDgw 
The poem is in the same tune as the song. Hope the verses are half as good as original.

मैने दिल से कहा, ढूंढ लाना ख़ुशी । 
नासमझ लाया गम, तो ये गम ही सही ।। 

कई जगह खोजा जूनून है 
जाने कहा खोया सुकून है 
तृप्ति का खज़ाना न हाथ आये, पलो के सिक्के फिसल जाए 

मैने कल से कहा, तेज़ आना नही । 
कल की याद मे गुज़ारनेदे, थोड़े और पल युही ।। 


तेरे लिए नही हम सही है 
तेरे सिवा हमदम नहीं है 
प्रीत जितना भी बरसाया, दिल को बंजर तेरे पाया 

मैने रब से कहा, दे मुझे प्यार की प्याली । 
शहतान वो दिया रम, तो ये रम ही सही ॥ 


जश्न मे भी दिल ये दफ़न है 
हंसी तो सिर्फ सफ़ेद कफ़न है 
स्तूप को सब ने देखा है, कब्र सिर्फ हमने जाना है 

धुंधली सी थी नज़र, परदे के गिरते ही,
हकीकत जो लाया अश्क़, आँख नम ही सही ॥ 

मैने दिल से कहा, ढूंढ लाना ख़ुशी । 
नासमझ लाया गम, तो ये गम ही सही ।। 

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