Monday, July 9, 2018

ATKAAV

रोजमर्रा की जिंदगी से फुर्सत तो मिलने दो,
जी लूँगा कुछ मै पल

छोटे मोटे काम कुछ और पूरा कर लेने दो,
जी लूँगा कुछ मै कल

दुनिया की खबर कुछ और कर लेने दो,
अपनी कर लूँगा मै कल 

समाज के इन झूठे तरीकों को कुछ और सीखने दो,
सच को जान लूँगा मै कल

अपने आप से भागते हुए पसीना थोड़ा और बहाने दो,
बैठ कर सांस ले लूँगा मै कल

संगीत के इस शोर में कुछ और बहरा होने दो,
मन का गीत सुन लूँगा मै कल

अंतरजाल(internet) की अनदेखी दुनिया में, अनजानो का हाल थोड़ा और पता करने दो,
अपनो से बात कर लूँगा मै कल

मेरे जीवन के कमरे में बिखरी पड़ी है जो चीज़ें, उन में सुकून को तलाशने तो दो,
जुनून को ढूंढ लूँगा मै कल

जनाभ तैरने की बात करते हैं, समुन्दर में मछली की तरह - सुनने में तो अच्छा है 
पर हमें तो नाला दिख रहा है - पत्थरों पे कदम रख कर चलने में लगे है

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